भारत का सबसे रहस्मयी गाँव - मलाणा गाँव

हिमांचल प्रदेश के कुल्लू ज़िले के अति दुर्गम इलाके में स्थित है मलाणा गाँव। इसे आप लोग भारत का सबसे रहस्मयी गाँव भी कह सकते हैं। मलाणा गाँव के लोग खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं। यहाँ पर भारतीय कानून नहीं चलते, यहां की अपनी ही संसद है जो सारे फैसले करती है। मलाणा गाँव भारत का इकलौता गाँव है जहाँ मुग़ल सम्राट अकबर की पूजा होती है। तो चलिए जानते हैं इस रहस्मयी गाँव के बारे में रहस्मयी बातें, जहाँ बाहरी व्यक्तियों के कुछ भी छूने पर 1000 ₹ से 2500 ₹ तक का जुर्माना देना पड सकता है।





अपनी विचित्र परम्पराओं लोकतान्त्रिक व्यवस्था के कारण पहचाने जाने वाले इस गाँव में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं। जिनके रुकने की व्यवस्था इस गाँव में नहीं है। पर्यटक गाँव के बहार टेंट में रहते हैं। अगर इस गाँव में किसी ने मकान-दूकान या यहाँ के किसी भी निवासी को छुआ तो यहाँ के लोग उस व्यक्ति से 1000₹ जुर्माना वसूलते हैं। ऐसा नहीं है कि यहाँ के निवासी यहाँ आने वाले लोगों से जबरिया वसूली करते हों। मलाणा के लोगों ने यहाँ हर जगह नोटिस बोर्ड लगा रखे हैं। इन नोटिस बोर्ड पर साफ साफ चेतावनी लिखी गयी है। गाँव के लोग बाहरी लोगों पर हर पल निगाह रखते हैं, जरा सी लापरवाही भी यहाँ आने वाले लोगों पर भारी पड़ जाती है। मलाणा गाँव में कुछ दुकानें भी हैं। इन पर गाँव के लोग तो आसानी से सामान खरीद सकते हैं, पर बाहरी लोग दूकान में नहीं जा सकते हैं न दूकान को छू सकते हैं।
बाहरी ग्राहकों को दूकान के बहार से ही खड़े होकर सामान मांगना पड़ता है।

इतिहास मलाणा गांव का इतिहास बहुत पुराना है. बहुत समय पहले इस गांव में “जमलू” ऋषि रहा करते थे. उन्होंने ही इस गांव के नियम-क़ानून बनाये थे. इस गांव का लोकतंत्र दुनिया का सबसे प्राचीन लोकतंत्र है. ऐसा माना जाता है कि जमलू ऋषि को आर्यों के समय से भी पहले से पूजा जाता है. जमलू ऋषि का उल्लेख पुराणों में भी आता है| मलाणा में रहने वाले निवासी आर्यों के वंशज माने जाते हैं. जबकि अन्य परंपरा के अनुसार मलाणा गांव के लोग अपने आपको सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं. बहुत समय पहले मुगल शासक अकबर अपनी बीमारी का इलाज करवाने यहां पर आया था. जब अकबर पूरी तरह से ठीक हो गया तो उसने यहां पर रहने वाले लोगों को कर से मुक्तकरवा दिया था.
सामाजिक सरंचना मलाणा गांव की सामाजिक सरंचना यहां के ऋषि जमलू देवता के अविचलित विश्वास व् श्रद्धा पर टिकी हुई है. पूरे गांव के प्रशासन को एक ग्राम परिषद के माध्यम से ऋषि जमलू के नियमों द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इस ग्राम परिषद में 11 सदस्य होते हैं जिनको ऋषि जमलू के प्रतिनिधियों के रूप में जाना जाता है. इस परिषद द्वारा लिया गया फैसला अंतिम होता है और यहां पर गांव के बाहर वालों के कोई नियम लागू नहीं होते. इस गांव की राजनीतिक व्यवस्था प्राचीन “ग्रीस” की राजनीतिक व्यवस्था से मिलती है. इस वजह से मलाणा गांव को “हिमालय का एथेंस” भी कहा जाता है.
भाषा व बोली मलाणा के निवासी एक रहस्यमयी भाषा बोलते हैं जोKanashi / Raksh (रक्ष) के नाम से जानी जाती है. कुछ लोग इसे राक्षस बोली मानते हैं. मलाणा की भाषा,संस्कृत और कई तिब्बती बोलियों का एक मिश्रण लगती है लेकिन यह आस पास बोली जाने वाली किसी भाषा या बोली से मेल नहीं खाती.

कुख्यात “मलाणा क्रीम” मलाणा क्रीम “भांग/चरस मार्किट” में सबसे महंगी और सबसे अच्छी चरस मानी जाती है. इसका कारण यहाँ की चरस में पाया जाने वाला उच्च-गुणवता का तेल है. स्थानीय पुलिस व प्रशासन मलाणा में भांग की खेती को हतोत्साहित करने के लिए समय समय पर अभियान चलाते हैं फिर भी काफी मात्रा में यहाँ से भांग की तस्करी बाहरी देशों में की जाती है.



मलाणा गाँव सदा से ही इतिहासकारों के लिए शोध का विषय रहा है और आगे भी रहेगा

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